स्प्रिंग टर्म 2019 के लिए पासिंग आउट परेड का आयोजन भारतीय नौसेना अकादमी, एझिमाला में किया गया

स्प्रिंग टर्म 2019 के लिए पासिंग आउट परेड का आयोजन भारतीय नौसेना अकादमी, एझिमाला में किया गया

25 मई, 2019 को एक शानदार पासिंग आउट परेड का आयोजन भारतीय नौसेना अकादमी (आईएनए) एझिमाला में किया गया जिसमें 264 प्रशिक्षु शामिल थे, इन प्रशिक्षुओं में भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल के मिडशिपमेन और कैडेट और दस अंतरराष्ट्रीय कैडेट शामिल थे, वे अपने प्रशिक्षण को नए सिरे से शुरू करने के बाद समाप्त करते हुए फ्लाइंग कलर के साथ पास हुए।

स्प्रिंग टर्म 2019 के चार अलग-अलग कोर्स से पास होने वाले मिडशिपमेन और कैडेट जिनसे संबंधित थे, उनके नाम इस प्रकार हैं: 96वां भारतीय नौसेना अकादमी कोर्स (बी.टेक), 96वां भारतीय नौसेना अकादमी कोर्स (एम.एससी), 27वां नौसेना दिशानिर्देश कोर्स (विस्तारित), 28वां नौसेना दिशानिर्देश कोर्स (नियमित) और 28वां नौसेना दिशानिर्देश कोर्स (तट रक्षक)। भारतीय नौसेना में शामिल होने के लिए परेड में 15 महिला कैडेटों को भी अपने पुरुष समकक्षों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ते हुए देखा गया। अनेक मित्र विदेशी राष्ट्रों के दस प्रशिक्षुओं में मालदीव, म्यांमार और सेशेल्स के दो-दो प्रशिक्षु, तंजानिया का एक प्रशिक्षु और श्रीलंका के तीन प्रशिक्षु शामिल थे। संस्था की स्थापना के बाद आईएनए से चार साल के बी.टेक पाठ्यक्रम को पूरा करने के लिए श्रीलंका के प्रशिक्षुओं के पासिंग आउट बैच को विदेशी प्रशिक्षुओं का पहला बैच होने का गौरव प्राप्त है।

परेड की समीक्षा जनरल बिपिन रावत, पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम, वाईएसएम, एसएम, वीएसएम, एडीसी, थल सेनाध्यक्ष द्वारा की गई, उन्होंने औपचारिक समीक्षा के बाद आठ मेधावी मिडशिपमेन और कैडेटों को मेडल दिए। इस अवसर पर वाइस एडमिरल आरबी पंडित, एवीएसएम, कमांडेंट, आईएनए, डॉ. अनुराग कुमार, निदेशक, भारतीय विज्ञान संस्थान, बैंगलोर, स्टेशन के वरिष्ठ अधिकारीगण और अन्य बाहरी गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।

पासिंग आउट परेड में सभी मिडशिपमेन और कैडेट के माता-पिता और अभिभावक भी मौजूद थे। भारतीय नौसेना अकादमी बी.टेक पाठ्यक्रम के लिए 'प्रेसिडेंट्स गोल्ड मेडल' का पुरस्कार मिडशिपमेन किल्लमसेट्टी विकास को दिया गया। नौसेना दिशानिर्देश कोर्स (विस्तारित) के लिए 'नौसेनाध्यक्ष गोल्ड मेडल' का पुरस्कार कैडेट सिद्धार्थ संकर को दिया गया। नौसेना दिशानिर्देश (नियमित) कोर्स के लिए 'नौसेनाध्यक्ष गोल्ड मेडल' और सर्वश्रेष्ठ महिला कैडेट के लिए 'ज़मोरिन ट्रॉफी' (पहली बार शुरू किया गया) का पुरस्कार कैडेट करिश्मा आर. को मिला। मेडल पाने वाले विजेता इस प्रकार हैं:-
(a)    आईएनएसी बी.टेक कोर्स के लिए सीएनएस सिल्वर मेडल (योग्यता में द्वितीय)        -    मिडशिपमेन समर्थ रवींद्र लिमये।

(b)    एनओसी (विस्तारित) के लिए एफओसी-इन-सी साउथ सिल्वर मेडल (योग्यता में द्वितीय)    -    कैडेट गौरव सांगवान।

(c)    आईएनएसी बी.टेक कोर्स के लिए एफओसी-इन-सी साउथ ब्रोंज मेडल (योग्यता में तृतीय)    -    मिडशिपमैन कृपा सिंधु पटेल।

(d)    एनओसी (नियमित) के लिए कमांडेंट आईएनए सिल्वर मेडल (योग्यता में द्वितीय)        -    कैडेट युगल गौतम।

(e)    एनओसी (विस्तारित) के लिए कमांडेंट आईएनए ब्रोंज मेडल (योग्यता में तृतीय)         -    कैडेट श्रेयश एस हंचिनल।

'औल्ड लैंग सीन" के पारंपरिक नोट के लिए स्लो मार्च में क्वार्टरडेक के नाम से ज्ञात अकादमी के सलामी चबूतरे के पीछे दो कॉलम में गठित और अपनी चमचमाती तलवारों और राइफल के साथ सलामी देते हुए सफल प्रशिक्षुओं के साथ शानदार समारोह की समाप्ति हुई, सहकर्मियों और सहयोगियों के साथ अंतिम विदाई लते समय विश्व भर में सैन्य बलों द्वारा बजाई जाने वाली मार्मिक विदाई धुन बजाई गई। पासिंग आउट कोर्स को भारतीय नौसेना एयर स्क्वाड्रन 303 के कमांडर विकाश नरवाल, एनएम के नेतृत्व में विक गठन में तीन मिग 29-K लड़ाकू विमान के एक बैच द्वारा विदाई दी गई, उन्होंने नौसेना के नए अधिकारियों का स्वागत करते हुए क्वार्टरडैक पर लो फ्लाई पास्ट किया और वे बम फोड़ युद्धाभ्यास के साथ समारोह में शामिल हुए।

परेड के पूरा होने पर, पास होने वाले मिडशिपमेन और कैडेट के गर्वान्वित माता-पिता और अभिभावकों ने नौसेना और तटरक्षक एपलेट्स में, जिसे स्ट्राइप्स के रूप में जाना जाता है, उनके वार्ड के कंधों पर इस प्रकार वे 'कैडेट' से परिवर्तित होकर पूर्ण रूप से नौसेना और तटरक्षक अधिकारियों में शामिल हुए। समीक्षा अधिकारी और अन्य गणमान्य व्यक्ति मेडल विजेताओं की स्ट्राइप में शिपिंग की और कठिन प्रशिक्षण में उनकी सफलता के लिए सभी प्रशिक्षार्थियों को बधाई दी। भारतीय नौसेना अकादमी में प्रशिक्षण के पूर्ण होने के बाद, ये अधिकारी विशेषज्ञ क्षेत्रों में अपने आगे के संबंधित प्रशिक्षण के लिए अनेक नौसेना और तट रक्षक पोतों और संस्थानों में जाएंगे।

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