भारतीय युद्धपोतों का व्लादिवोस्तोक, रूस दौरा

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भारतीय युद्धपोतों का व्लादिवोस्तोक, रूस दौरा

ज़ोलोटॉय रोग बे ब्रिज के निकट बंदरगाह में प्रवेश के दौरान आईएनएस सह्याद्री

भारत एवं रूस के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता तथा भारतीय नौसेना के बढ़ते कदमों एवं परिचालनात्मक दायरे के विस्तार की अभिव्यक्ति के तौर पर, दक्षिण चीन सागर में पूर्वी बेड़े की तैनाती के भाग के रूप में भारतीय नौसेना के जहाज सहयाद्रि, शक्ति और किर्च आज पूर्वी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर, रियर एडमिरल एस. वी. भोकारे, वाईएसएम, एमएम की अगुवाई में चार दिवसीय यात्रा (27 जून - 01 जुलाई 2016) पर व्लादिवोस्तोक, रूस पहुंचे।

भारतीय युद्धपोतों का व्लादिवोस्तोक, रूस दौरा

ज़ोलोटॉय रोग बे ब्रिज के निकट बंदरगाह में प्रवेश के दौरान आईएनएस किर्च

इस यात्रा के दौरान, दोनों नौसेनाओं के बीच आपसी सहयोग को बेहतर बनाने के उद्देश्य से भारतीय नौसेना के जहाजों तथा रूसी नौसेना के बीच पेशेवर स्तर की वार्ता होगी। इसके अलावा, दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच आपसी समझ और संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से दोनों देशों की सरकारों एवं सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की मुलाकात, खेल एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के आयोजन तथा बेहतर कार्यप्रणाली को साझा करने की योजना भी बनाई गई है। व्लादिवोस्तोक से प्रस्थान के बाद, भारतीय युद्धपोत रूसी नौसेना के साथ एक अभ्यास में भाग लेगा, जिसका उद्देश्य संचार के साथ-साथ खोज एवं बचाव प्रक्रियाओं में अन्तरसंक्रियता को बेहतर बनाना है। आईएनएस सह्याद्री की कमान कैप्टन के. एस. राजकुमार के हाथों में है, जबकि आईएनएस शक्ति की कमान कैप्टन गगन कौशल के पास तथा आईएनएस किर्च की कमान कमांडर शरद सिंशुन्वाल के हाथों में है।

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एफओसीईएफ का स्वागत करते हुए कमांडर झोव्तोनोज़्खे अलेक्सी, जहाज के ब्रिगेड कमांडर

भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय संबंधों में प्रगाढ़ता संस्कृति, व्यापार और अर्थव्यवस्था, विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा सबसे महत्वपूर्ण रक्षा क्षेत्र में सहयोग एवं परस्पर सहभागिता पर आधारित है। दोनों देशों के बीच सहयोग के अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, हाइड्रोकार्बन की खोज और परमाणु ऊर्जा का शांतिपूर्ण उपयोग शामिल हैं। भारत-रूस सैन्य तकनीकी सहयोग एक सरल क्रेता-विक्रेता ढांचे से विकसित हुआ है, जिसमें उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों एवं प्रणालियों के क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान, विकास और उत्पादन शामिल हैं। ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली, संयुक्त रूप से डिजाइन एवं विकसित किए गए पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान, एसयू-30 विमानों एवं टी-90 टैंकों का लाइसेंस प्राप्त उत्पादन तथा भारतीय नौसेना में विमान वाहक विक्रमादित्य को शामिल किया जाना इस सामरिक साझेदारी का प्रमाण है। भारतीय और रूसी नौसेना हथियार प्रणालियों और उपकरणों के क्षेत्र में दूरी और भाषा की बाधाओं को दूर करते हुए एक-दूसरे के साथ स्थायी संबंधों को बरकरार रखा है। दोनों नौसेनाएं प्रशिक्षण टीमों, उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडलों और युद्धपोतों की पारस्परिक यात्राओं के अलावा समुद्रिक अभ्यास "इंद्रा नेवी" श्रृंखला के माध्यम से प्रतिवर्ष एक-दूसरे के साथ मिलती हैं। पिछली बार भारतीय नौसेना के जहाज रणविजय, शिवालिक और शक्ति, जुलाई 2014 में रूस के व्लादिवोस्तोक आए थे।

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ब्रेकिंग द ब्रेड समारोह

मौजूदा यात्रा का उद्देश्य भारतीय नौसेना तथा रूसी नौसेना के बीच समुद्रिक सहयोग को बेहतर बनाना है। इससे भारत और रूस के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध सुदृढ़ होंगे तथा विश्व के इस महत्वपूर्ण हिस्से में सुरक्षा एवं स्थायित्व को बरकरार रखने में मदद मिलेगी।

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घाट पर मीडिया के साथ संवाद

भारतीय युद्धपोतों का व्लादिवोस्तोक, रूस दौराभारतीय युद्धपोतों का व्लादिवोस्तोक, रूस दौरा

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