भारतीय युद्धपोतों का बुसान, दक्षिण कोरिया दौरा

भारतीय युद्धपोतों का बुसान, दक्षिण कोरिया दौरा

भारतीय युद्धपोतों का बुसान, दक्षिण कोरिया दौराभारतीय युद्धपोतों का बुसान, दक्षिण कोरिया दौरा

                   बुसान का सामान्य मौसम                                 आईएनएस सह्याद्री जहाज पर मौजूद पायलट

भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ तथा भारतीय नौसेना के बढ़ते कदमों एवं परिचालनात्मक दायरे के विस्तार की अभिव्यक्ति के तौर पर, दक्षिणी चीन सागर में पूर्वी बेड़े की तैनाती के भाग के रूप में भारतीय नौसेना के जहाज सहयाद्रि, शक्ति और किर्च आज पूर्वी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर, रियर एडमिरल एस. वी. भोकारे, वाईएसएम, एमएम की अगुवाई में चार दिवसीय यात्रा पर 21 जून 16 को बुसान पहुंचे।

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                   सेतुबंध 1 की ओर अग्रसर सह्याद्री                                तट के साथ सुरक्षित आईएनएस शक्ति

इस यात्रा के दौरान, दोनों सेनाओं के बीच आपसी सहयोग को बेहतर बनाने के लिए भारतीय नौसेना के पोत तथा कोरिया गणराज्य (आरओके) की नौसेना के बीच पेशेवर स्तर की वार्ता होगी। इसके अलावा, दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच आपसी समझ और संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से सरकार एवं सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मुलाकात, खेल एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के आयोजन तथा बेहतर कार्यप्रणाली को साझा करने की योजना भी बनाई गई है। बुसान से प्रस्थान के बाद सभी जहाज आरओके नौसेना के साथ एक अभ्यास में भाग लेंगे, जिसका उद्देश्य संचार के साथ-साथ खोज एवं बचाव प्रक्रियाओं में अन्तरसंक्रियता को बेहतर बनाना है। आईएनएस सह्याद्री की कमान कैप्टन के. एस. राजकुमार के हाथों में है, जबकि आईएनएस शक्ति की कमान कैप्टन गगन कौशल के पास तथा आईएनएस किर्च की कमान कमांडर शरद सिंशुन्वाल के हाथों में है।

भारत और कोरिया के बीच प्राचीन काल से ही ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। भगवान बुद्ध के चिरस्थायी दर्शन, जिसने दोनों देशों के लोगों के जीवन एवं विचारों को प्रभावित किया है, भी संबंधों की एक सशक्त कड़ी है। आधुनिक युग में राजनीतिक एवं आर्थिक अनिवार्यताओं के कारण भारत और आरओके के बीच के घनिष्ठ संबंधों में मजबूती आई है। जनवरी 2014 में महामहिम राष्ट्रपति पार्क गीन-हाई की भारत यात्रा और मई 2015 में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की कोरिया यात्रा से परंपरागत रूप से निकट द्विपक्षीय संबंधों को प्रोत्साहन मिला है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग निरंतर आगे बढ़ रहा है और हाल के वर्षों में इसमें कई गुना वृद्धि हुई है। दोनों देशों ने एक व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें जहाज निर्माण और इलेक्ट्रॉनिक्स हार्डवेयर विनिर्माण पर विशेष बल दिया गया है।

पिछले कुछ वर्षों में भारत और कोरिया गणराज्य के बीच रक्षा एवं सुरक्षा के क्षेत्र में संबंध निरंतर बेहतर हुए हैं तथा 16 अप्रैल को रक्षा मंत्री की अगुवाई में भारतीय रक्षा प्रतिनिधिमंडल की यात्रा के साथ संबंधों में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के लिए सदस्यता, बहु-पार्श्व संगोष्ठियों/मंचों में भागीदारी, बंदरगाहों का पारस्परिक दौरा, उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडलों और प्रशिक्षण एक्सचेंजों ने दोनों देशों के बीच नौसेना सहयोग को बल मिला है। प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों, बहु-पार्श्व सेमिनारों/मंचों, पारस्परिक बंदरगाह दौरे, उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडलों तथा प्रशिक्षण के आदान-प्रदान ने दोनों देशों के बीच नौसेना सहयोग को मजबूती प्रदान की है। इसके अलावा, दोनों देशों ने सैन्य अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में भी बेहतर संबंधों का निर्माण किया है तथा भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और आरओके के रक्षा अधिग्रहण कार्यक्रम प्रशासन (डीएपीए) के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। आखिरी बार किसी भारतीय जहाज ने अक्टूबर 2015 में कोरिया गणराज्य की यात्रा की थी, जब सह्याद्री का इनचान आगमन हुआ था।

मौजूदा यात्रा से भारतीय नौसेना और आरओके नौसेना के बीच समुद्रिक सहयोग को प्रोत्साहन मिला है। इससे आने वाले दिनों में भारत और कोरिया गणराज्य के बीच के मैत्रीपूर्ण संबंध और भी मजबूत होंगे तथा और दुनिया के इस महत्वपूर्ण भाग में सुरक्षा एवं स्थायित्व को बरकरार रखने में मदद मिलेगी।

 

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