संग्राम पदक

Sangram Medal

प्राधिकार

दिनांक 17 जनवरी 73 की राष्ट्रपति सचिवालय अधिसूचना सं.1-Pres/73

पात्रता की शर्तें एवं पात्रों की श्रेणियाँ

3 दिसंबर 71 से 20 दिसंबर 72 (दोनों तारीखों को शामिल करते हुए) की अवधि के बीच निम्नलिखित सशस्त्र बलों में प्रभावी कार्यभार संभालने वाले सभी वर्गों के सैन्यकर्मियों को सम्मानित किया गया।

  • सेना, नौसेना, वायुसेना के साथ-साथ किसी भी रिज़र्व बल, प्रादेशिक सेना एवं जम्मू-कश्मीर रक्षक योद्धा तथा संघ के किसी भी अन्य सशस्त्र बलों के सभी रैंकों के कर्मी;
  • रेलवे सुरक्षा बल, पुलिस बल, गृह रक्षा वाहिनी, नागरिक रक्षा संगठन और सरकार द्वारा निर्दिष्ट किसी भी अन्य संगठन के सभी रैंकों के कर्मी, जो संक्रियात्मक क्षेत्रों में तैनात हैं, अर्थात, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, गुजरात, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, मिजोरम एवं त्रिपुरा, तथा सरकार द्वारा निर्दिष्ट ऐसे अन्य क्षेत्रों में तैनात किये गए किसी भी या सभी उपरोक्त संगठनों के सदस्य; तथाand
  • संक्रियात्मक क्षेत्रों में उपर्युक्त बलों के आदेश/दिशानिर्देशों/पर्यवेक्षण के अधीन नियमित रूप से या अस्थायी रूप से काम करने वाले सभी असैनिक नागरिक।

यह सम्मान मरणोपरांत दिया जा सकता है।

पदक और रिबन की बनावट

पदक: ताम्र-निकल से निर्मित इस गोलाकार पदक का व्यास 35 मिमी होता है, जिसके ऊपर एक छल्ला बना होता है। इसके अग्र भाग पर आदर्श वाक्य के साथ राजकीय चिह्न बना होता है, और इसके दोनों ओर बाहरी सिरे पर “संग्राम मेडल” उत्कीर्ण होता है। इसके पृष्ठभाग पर केंद्र में उगता हुआ सूर्य और इसके नीचे दोनों तरफ जयपत्र की लड़ी बनी होती है।

रिबन: मरून रंग की पृष्ठभूमि के साथ 32 मिमी की चौड़ाई वाला यह रेशमी रिबन, सफेद रंग की तीन खड़ी धारियों के साथ चार बराबर भागों में विभाजित होता है।

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