वर्तमान स्थिति

भारतीय नौसेना से जुड़े ताज़ा समाचार। भारतीय नौसेना ने उपकरणों और घटकों सहित युद्धपोत के संपूर्ण निर्माण की दिशा में घरेलू तौर पर योग्यता और क्षमता के विकास का कार्य शुरू कर दिया है। इसलिए पिछले कुछ दशकों के दौरान, हमारा दर्जा ख़रीदार नौसेना से तेज़ी से बदलते हुए निर्माता नौसेना का हो गया है। इसके लिए भारतीय उद्योग ने पोत/पनडुब्बी डिज़ाइन, निर्माण सामग्री, मशीनरी, उपकरण और प्रणाली एकीकरण की दिशा में सक्रिय भागीदारी की है।

भा नौ पो अजय पहला स्वदेशी रूप से निर्मित पोत था, जिसे ‘गिरी’ श्रेणी के फ्रिगेट के निर्माण के बाद 1961 में गार्डेन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स, कोलकाता द्वारा वितरित किया गया था। 70 और 80 के दशक में, सीखने की अवस्था में वृद्धि हुई क्योंकि हमने गोदावरी, ब्रह्मपुत्र और खुखरी श्रेणी के पोतों की निरंतर जटिल डिजाइन और निर्माण के साथ प्रगति की थी जिसके बाद अधिक उन्नत और शक्तिशाली दिल्ली श्रेणी के विनाशकों, शिवालिक श्रेणी की स्टील्थ फ्रिगेट्स, कोलकाता श्रेणी के विनाशकों, कामोर्टा श्रेणी और हमारे शिपयार्ड में P-75 पनडुब्बी (डीसीएनएस के साथ टीओटी) निर्माण किया गया था।

अब तक, भारतीय शिपयार्ड में 132 से अधिक युद्धपोतों का निर्माण किया गया है। वर्तमान में, 49 पोत और पनडुब्बी सार्वजनिक/ निजी भारतीय शिपयार्ड में निर्माणाधीन हैं और केवल दो पोत ही विेदेशी शिपयार्ड में निर्माणाधीन हैं। बहुत जल्द, भारत के पास अपना डिज़ाइन किया हुआ एयरक्राफ्ट कैरियर होगा - जोकि एक ऐसी क्षमता है जिसका दावा फिलहाल केवल कुछ ही देश कर सकते है। स्वेदशीकरण पर निरंतर प्रभाव के परिणामस्वरूप स्वदेशी सामग्री में लगातार वृद्धि हुई है।

नौसेना की प्रणालियों और मंचों का स्वदेशी विकास बहुत ही विशेषीकृत होता है, जिसके लिए उनके संबंधित क्षेत्रों में गहरी समझ की आवश्यकता होती है। इसलिए, घरेलू क्षमता का विकास नौसेना में वर्टिकल रूप से विशेषीकृत संगठनों में विवेकपूर्ण तरीके से और बहुत सोच विचारकर वितरित किया गया है जो सतही पोत डिज़ाइन, पनडुब्बी डिज़ाइन, हथियार प्रणाली एकीकरण, आयुध, आदि में सहायता करता है। एक असरदार नौसेना मंच के निर्माण के लिए उचित प्रौद्योगिकियों और उत्पादों के विकास में नौसेना डीआरडीओ की क्षमताओं का भी लाभ उठा रही है।

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन, ऑर्डिनेंस फैक्ट्री और भारतीय उद्योग की सहायता से, भारतीय नौसेना प्रमुख प्रणालियों को स्वदेशी बनाने में सक्षम हो गई है, जैसे कि सोनार, सैटेलाइट कम्यूनिकेशन, ईडब्ल्यू उपकरण, टोरपेडो, रॉकेट लांचर और मिसाइलों के घटक। इसके अतिरिक्त, भारतीय नौसेना सक्रिय रूप से हथियारों और संवेदकों को बड़ी मात्रा में विकसित कर रही है, जैसे एयर मिसाइल के लिए मीडियम रेंज सर्फेस, एंटी सबमरीन वारफेयर सिस्टम, कम्यूनिकेशन सूइट्स और इलेक्ट्रोनिक वारफेयर सिस्टम। इसके अतिरिक्त, सीएसआईआर प्रयोगशालाओं के जरिए भी भा नौ की कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है। भा नौ से संबन्धित सीएसआईआर की प्रयोगशालाओं का विवरण जानने के लिए,यहां क्लिक करें।

अभी तक जिन उपकरणों और स्पेयर्स की क़िस्मों का स्वदेशिकरण किया जा चुका है, वो इस प्रकार से हैं:

क) डीओआई: 16 प्रमुख उपकरण (2202 स्पेयर्स के साथ आईएनसीएटी) और 08 असेंबली

ख) आईयू (ई): 1640 (सबअसेंबली/स्पेयर्स)

ग) आईयू (डबल्यू): 495 (सबअसेंबली/स्पेयर्स)

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