राष्ट्रीय समर स्मारक

राष्ट्रीय समर स्मारक

25 फरवरी 2019 को भारत के प्रधानमंत्री द्वारा देश की ओर सेना को राष्ट्रीय समर स्मारक समर्पित किया जाएगा। यह स्मारक हमारे देश के सम्मान की रक्षा में हमारे वीर नायकों की विजय और बहादुरी का प्रतीक है। यह बहुप्रतीक्षित राष्ट्रीय समर स्मारक तीर्थस्थल के रूप में आगंतुकों को सेना और इसके वीर नायकों के साथ एक उद्देश्यपूर्ण संबंध कायम करने का मौका प्रदान करेगा। यह स्मारक एक गहरा व सुखद अनुभव प्रदान करते हुए सेना के प्रति आदर और गर्व की भावना उत्पन्न करेगा और भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा के प्रतीक के रूप में कार्य करेगा। उच्च नैतिक मूल्यों, बलिदान और राष्ट्रीय गौरव की भावना पैदा करने के साथ ही यह स्मारक संबंध और अपनेपन की भावना को भी मजबूती प्रदान करेगा। इस स्मारक का निर्माण मौजूदा कैनोपी, आलीशान इंडिया गेट और राजसी राजपथ के चारों ओर षटकोण में सहज रूप से विलीन होने और उसे पूरक बनाने के लिए किया गया है। यह स्मारक उन 25,942 भारतीय सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान का स्मरण कराता है जिन्होंने आज़ादी के उपरांत देश की संप्रभुता और अखंडता के लिए अपने प्राणों की आहूति दी। यह स्मारक हमारे उन 21 बहादुरों की बहादुरी और वीरता का भी सम्मान करता है जिन्हें हमारे देश के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार, परम वीर चक्र को पाने का गौरव प्राप्त हुआ है। इस स्मारक के निर्माण में अमर चक्र, वीर चक्र, त्याग चक्र और रक्षक चक्र सहित चार संकेंद्रित गोले शामिल हैं। स्मारक परिसर में एक सेंट्रल ओबिलिस्क, एक शाश्वत लौ भित्तिचित्र, ग्राफिक पैनल शहीदों के नामों के शिलालेख और अन्य विषयों के अलावा परम वीर चक्र प्राप्तकर्ताओं की प्रतिमाएं शामिल हैं। राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में एक शोक मग्न प्रकाश व्यवस्था शामिल है जो उन सैनिकों की वीरता और बलिदान की याद दिलाती है जिनके नाम व्यक्तिगत शिला लेखों के ऊपर स्वर्ण अक्षरों से उकेरे गए हैं। संपूर्ण प्राकृतिक दृश्य वाली वास्तुकला संपूर्ण डिज़ाइन में समाई हुई है जिसके करण यह एक तल्लीन और विचारोत्तेजक वातावरण प्रदान करते हुए भावनात्मक और दृश्यात्मक अनुभव प्रदान करती है।

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