भारतीय नौसेना के लिए 111 नौसेना यूटिलिटी हेलीकॉप्टरों (एनयूएच) के लिए रुचि की अभिव्यक्ति (ईओआई)

भारतीय नौसेना के लिए 111 नौसेना यूटिलिटी हेलीकॉप्टरों (एनयूएच) के लिए रुचि की अभिव्यक्ति (ईओआई)

12 फरवरी 2019 को भारतीय नौसेना के लिए 111 नौसेना यूटिलिटी हेलीकॉप्टरों (एनयूएच) की खरीद हेतु भावी भारतीय सामरिक भागीदारों और विदेशी ओईएम के चयन के लिए पहली बार रक्षा मंत्रालय ने रुचि की अभिव्यक्ति जारी की है। ये हेलीकॉप्टर चेतक हेलीकॉप्टरों का स्थान लेंगे और हालाँकि इनका उपयोग एसएआर, सीएएसईवीएसी, एलआईएमओ, यात्री भूमिकाओं और टारपीडो उतारने के लिए किया जाएगा। 111 में से 95 हेलीकॉप्टरों का निर्माण भारत में चुनिंदा भारतीय सामरिक भागीदार द्वारा किया जाएगा। 25 अगस्त 2018 को डीएसी द्वारा केस को अनुमोदित किया गया। इस परियोजना द्वारा सरकार की 'मेक इन इंडिया' पहल को बढ़ावा और भारत में हेलीकॉप्टरों के लिए निर्माण क्षमता को प्रोत्साहन देने की संभावना है।

इस परियोजना में भाग लेने हेतु भारतीय निजी कंपनियों से ईओआई का अनुरोध रक्षा मंत्रालय/भारतीय नौसेना की वेबसाइट पर 12 फरवरी 2019 को आयोजित किया गया है। हालाँकि, विदेशी ओईएम से ईओआई के लिए अनुरोध आरएफआई विचार-विमर्श में भाग लेने वाली कंपनियों को भेज दिया गया है। ओईएम को भारत में एनयूएच के लिए डिज़ाइन, एकीकरण और निर्माण प्रक्रियाओं सहित समर्पित निर्माण लाइन को स्थापित करने और प्रस्तुत किए जा रहे एनयूएच मंच के लिए भारतीय निर्माण लाइन को विशेष रूप से वैश्विक सुविधा बनाने का आदेश दिया गया है।

जबकि भारतीय कंपनियों को ईओआई के लिए जवाब देने के लिए दो माह का समय दिया गया है, आवश्यक इनपुट्स की प्रकृति को देखते हुए विदेशी ओईएम को जवाब देने के लिए तीन माह का समय दिया गया है। मैसर्स टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड, महिंद्रा डिफेंस, अदानी डिफेंस, एलएंडटी, भारत फोर्ज और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर वो भावी भारतीय कंपनियां हैं जिनके इस प्रक्रिया में भाग लेने की संभावना है। भारतीय कंपनियों का चयन उनकी प्रणाली एकीकरण की क्षमता, एयरोस्पेस क्षेत्र में सुविधा और वित्तीय क्षमता के आधार पर किया जाएगा। विदेशी ओईएम में मैसर्स लॉकहीड मार्टिन, मैसर्स एयरबस हेलीकॉप्टर्स, मैसर्स बेल हेलीकॉप्टर्स और मैसर्स आरओई के परियोजना में भाग लेने की संभावना है। एनयूएच परियोजना के माध्यम से हेलिकॉप्टर का उच्च स्तरीय स्वदेशीकरण यानी लगभग 60% स्वदेशीकरण करने की इच्छा रखी गई है। चयनित भारतीय कंपनियों को इस वर्ष की अंतिम तिमाही तक खरीद के लिए आरएफपी जारी किए जाने की संभावना है।

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