भारतीय नौसेना अकादमी, एज्हिमाला में दिल्ली सीरीज़ सीपॉवर सेमीनार 2019 की शुरुआत

भारतीय नौसेना अकादमी, एज्हिमाला में दिल्ली सीरीज़ सीपॉवर सेमीनार 2019 की शुरुआत

'राष्ट्रों का भविष्य निर्धारित करने में समुद्री शक्ति की भूमिका' पर वार्षिक रूप से आयोजित दिल्ली सेमीनार का छठा संस्करण भारतीय नौसेना अकादमी (भा नौ अ) में 17 अक्तूबर 2019 को शुरू किया गया। अनेक सेवारत और सेवानिवृत्त वरिष्ठ नौसेना अधिकारी, प्रख्यात शिक्षाविद, प्रबुद्ध मंडलों के प्रतिनिधि, रक्षा विशेषज्ञ और प्रतिष्ठित दिग्गज दो दिवसीय सेमीनार में भाग ले रहे हैं।

सेमीनार की शुरुआत वाइस एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी, एवीएसएम, एनएम, कमांडेंट, भा नौ अ के भाषण से की गई। इसके बाद मुख्य अतिथि एडमिरल माधवेंद्र सिंह, एवीएसएम, एनएम (सेवानिवृत्त), भूतपूर्व नौसेनाध्यक्ष, भारतीय नौसेना द्वारा मुख्य भाषण दिया गया।

डॉ. दत्तेश पारुलकर की अध्यक्षता में 'समुद्री शक्ति बनाम भू शक्ति - एक ऐतिहासिक दृष्टिकोण' के पहले दिन के पहले सत्र की शुरुआत में कमांडर बी श्रीनिवास द्वारा 'तटीय सुरक्षा: समुद्र में प्रभुत्व' विषय पर एक प्रस्तुति प्रदान की गई। यह अधिकारी नेविगेशन व डायरेक्शन विशेषज्ञ हैं जिनके पास गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी से अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून में डिप्लोमा है। इस सत्र में समुद्री शक्ति और भू शक्ति के बीच अंतर, उनकी पारस्परिक निर्भरता, और भविष्य के लिए कुछ सबक की जानकारी दी गई।

दूसरा पेपर - 'समुद्री शक्ति बनाम भू शक्ति: भारतीय (और भारतीय नौसेना) दृष्टिकोण' - जिसे कोमोडोर श्रीकांत बी केस्नूर द्वारा प्रस्तुत किया गया, इसमें बताया गया कि कैसे भारतीय विचारकों की नज़र में कैसे समुद्री सीमाओं को नज़रंदाज़ करते हुए भारत में केवल भू सीमा पर ही अधिक ध्यान दिया जाता रहा। इस प्रस्तुति में अधिग्रहण के साथ ही वैचारिक और सैद्धांतिक विकास के संदर्भ में स्वतंत्रता के समय नौसेना और उसके बाद नौसेना के विकास पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।

दिन के पहले सत्र का समापन वाइस एडमिरल गिरीश लूथरा, पीवीएसएम, एवीएसएम, वीएसएम (सेवानिवृत्त) भूतपूर्व फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ, पश्चिमी नौसेना कमान द्वारा एक आमंत्रण वार्ता के साथ किया गया।

दिन का दूसरा सत्र - 'समुद्री शक्ति और भू अर्थव्यवस्था' - जिसकी अध्यक्षता कैप्टेन आलोक बंसल ने की इसमें दो पेपर शामिल थे, अर्थात कोमोडोर ओदक्कल जॉनसन द्वारा 'उभरती भू अर्थव्यवस्था में समुद्री शक्ति का बढ़ता प्रभाव', और कोमोडोर गोपाल सूरी द्वारा 'समुद्री शक्ति और भू अर्थव्यवस्था'। इन पेपरों में प्रारंभिक, मध्ययुगीन और आधुनिक समय में समुद्री इतिहास के ज़रिये भू-अर्थव्यवस्था की प्रासंगिकता की जाँच की गई; यह एक ऐसा सिद्धांत है जो कि कई सदियों से मौजूद है और जिसकी आज भी प्रासंगिकता है।

सेमीनार के अंतिम दिन, 18 अक्तूबर 2019 को चार पेपर प्रस्तुत किए जाएंगे। इसमें वर्तमान में अकादमी में अपने 8वें टर्म में भा नौ अ के मिडशिपमेन द्वारा 'समुद्री शक्ति के साथ भू राजनीति और भू अर्थव्यवस्था को जोड़ना' के ऊपर एक पेपर शामिल किया जाएगा. अन्य पेपर प्रस्तुतकर्ता हैं श्री नितिन पाई, डॉ. जबीन टी जैकब और सुश्री ऋतिका कपूर। कोमोडोर उदय भास्कर, वीएसएम, (सेवानिवृत्त), निदेशक, द सोसाइटी फॉर पॉलिसी स्टडीज़ इस सत्र के अध्यक्ष होंगे।

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