फ्लैग ऑफ़ समारोह - आईएनएस तरंगिनी, लोकायन-18

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आईएनएस तरंगिनी, भारतीय नौसेना का समुद्र यात्रा प्रशिक्षण जहाज़, लोकायन के लिए कोच्चि से चला। ये एक सात महीने लंबी यूरोप की यात्रा है जिसका विषय 'विभिन्न महासागरों और संयुक्त राष्ट्र की समुद्रयात्रा' है। ये जहाज़ 15,000 नॉटिकल मील से अधिक की दूरी तय करता हुआ 13 देशों में 15 बंदरगाहों का दौरा करेगा। वह फ्रांस स्थित बॉरदॉ में बिस्के टॉल शिप दौड़ के समापन समारोह में भाग लेगा और साथ ही संडरलैंड, यूनाइटेड किंगडम से आरंभ हो रही टॉल शिप दौड़ में भी भाग लेगा। नौ अधिकारी, 40 नाविक और 150 कैडेट इस समुद्री यात्रा में भाग लेंगे। विभिन्न चरणों में 30 विदेशी प्रशिक्षार्थियों के भी जहाज़ पर सवार होने की उम्मीद है।

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इस जहाज़ को 10 अप्रैल 2018 को कोच्चि स्थित नौसेना बेस से वाइस एडमिरल एआर कर्वे, पीवीएसएम, एवीएसएम, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, दक्षिणी नौसेना कमान द्वारा औपचारिक रूप से फ्लैग-ऑफ किया गया था।

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आईएनएस तरंगिनी भारतीय नौसेना का पहला समुद्री यात्रा प्रशिक्षण जहाज़ (एसटीएस) है। इस जहाज़ का निर्माण गोवा शिपयार्ड में किया गया और 11 नवंबर 97 को इसे कमीशन किया गया। इसका तरंगिनी नाम हिंदी शब्द 'तरंग' से लिया गया है जिसका अर्थ होता है लहरें; इस प्रकार तरंगिनी का अर्थ होता है 'वह जो तरंगों पर सवारी करता है'। यह जहाज़ तीन मस्तूल वाला 'बार्क' है और सामने वाले और मुख्य मस्तूल पर चौकोर में बल्लियों, रस्सों आदि से व्यवस्थित है (यानी पाल केंद्र रेखा के लंब में स्थित हैं); और सबसे पीछे के मस्तूल पर आगे और पीछे से बल्लियों, रस्सों आदि से व्यवस्थित है (यानी पाल केंद्र रेखा के साथ-साथ होते हैं)।

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इस जहाज़ का ढांचा इस्पात से निर्मित है, जहाँ डेकहाउस एल्युमिनियम से बना है और डेक और इंटीरियर में सागौन की लकड़ी का इस्तेमाल किया गया है। इसमें 20 पाल लगे हुए हैं, और इसका कुल पाल क्षेत्र लगभग 10,000 वर्ग फीट है। यह जहाज़ बहुत टिकाऊ है और 20 से भी अधिक दिन की अवधि तक लगातार समुद्र में रह सकता है। स्थायी कर्मीदल के रूप में इस जहाज़ पर पांच अधिकारी और 35 नाविक तैनात रहते हैं, और इस जहाज़ पर 30 कैडेट ठहर सकते हैं और समुद्री यात्रा का प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं।

इस जहाज़ की मुख्य भूमिका नौसेना में करियर बनाने की राह पर चले अधिकारी प्रशिक्षार्थियों में साहस, सौहार्द और धैर्य की अनेक वर्षों से चली आ रही परंपरा को मजबूत करना है। निगरानी और पाल इस जहाज़ पर नाविक विद्या प्रशिक्षण प्राप्त करते हुए हवा और लहरों के प्राकृतिक तत्वों का अनुभव करने का एक आदर्श स्थान प्राप्त होता है। इस प्रशिक्षण में पाल की स्थापना और समेटना, निगरानी और टैकिंग और जाइबिंग जैसे पाल कौशल शामिल होते हैं। 'टॉल शिप' समुदाय का मानना है कि ऐसे जहाज़ों पर प्रशिक्षण प्राप्त करके ही प्रशिक्षार्थियों में अवर्णीय 'समुद्री-भावना' और तत्वों के लिए सम्मान को जागृत किया जा सकता है, जो सुरक्षित और सफल समुद्री यात्रा के लिए अनिवार्य होते हैं।

आईएनएस तरंगिनी भारतीय नौसेना का एकमात्र कमीशन किया गया जहाज़ है जिसने दुनिया का चक्कर लगाया है; ये उपलब्धि 2003-04 में हासिल की गई थी। अनेक वर्षों से, इस जहाज़ को उसके मूल बंदरगाह से दूर लंबी अवधि के लिए तैनात किया जाता रहा है और इसने चार मौकों पर टॉल शिप दौड़ में भी भाग लिया है। इन दौड़ों के दौरान, भाग लेने वाले सभी नौसेना जहाज़ों में पहली बार वर्ग दौड़ जीत कर देश के लिए पुरस्कार प्राप्त किया और इसे लोकायन - 04 में भाग लेने के लिए गृह बंदरगाह से सबसे दूर यात्रा करने के लिए विशेष पुरस्कार भी प्रदान किया गया। अपने शानदार अतीत के साथ इस जहाज़ ने एक उदाहरण स्थापित किया है और अभी भी ये जहाज़ अपने प्रशिक्षार्थियों में साहस की भावना और प्रकृति के लिए प्यार भरने की इच्छा रखता है।

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