प्रशिक्षण प्रमाणीकरण व निगरानी का मानक (एसटीसीडब्लू) - 1995 व सेवा अधिकारियों को सीडीसी का वितरण

प्रशिक्षण प्रमाणीकरण व निगरानी का मानक (एसटीसीडब्लू) - 1995

सेवा प्रमाणपत्र (सीओएस) - पृष्ठभूमि

मर्चेंट शिपिंग (एमएस) अधिनियम 1958 की धारा 80 (निरस्त) 'एक्स' शाखा में लेफ्टिनेंट रैंक के भारतीय नौसेना अधिकारी को बिना किसी परीक्षा के मास्टर ऑफ़ फॉरेन गोइंग मर्चेंट का सेवा प्रमाणपत्र (सीओएस) जारी करने का अधिकार देती थी । इसी तरह, इंजीनियरिंग शाखा में लेफ्टिनेंट को विदेश जाने वाले जहाज़ों का मुख्य इंजिनियर के सीओएस का अधिकार था ।

ये सीओएस सभी प्रकार से योग्यता प्रमाणपत्र (सीओसी) के बराबर था जिसे मर्चेंट मरीन अधिकारियों को निर्धारित परीक्षा में उत्तीर्ण होने बाद जारी किया गया था । अधिनियम की इस धारा की उत्पत्ति नौसेना अधिकारियों के प्रशिक्षण और अनुभव व आपात स्थितियों और युद्ध के समय में राष्ट्र की सामरिक आवश्यकताओं के अनुरूप यूनाइटेड किंगडम में समान प्रावधानों पर आधारित थी ।

इंटरनेशनल मैरीटाइम आर्गेनाईजेशन (आईएमओ) द्वारा वर्ष 1978 में नाविकों के लिए प्रशिक्षण, प्रमाणीकरण और निगरानी के मानकों पर एक सम्मलेन का आयोजन किया गया जहां समुद्र में सुरक्षा को बेहतर बनाने और व्यापार की बदलती आवश्यकताओं, ज़हाज़ों के डिज़ाइन आदि को ध्यान में रखते हुए नाविकों के प्रशिक्षण में अनेक बदलावों का सुझाव दिया गया था । अन्यत्रता के रूप में एसटीसीडब्लू-78 का प्रयोग करते हुए, डीजी शिपिंग ने 14 अगस्त 86 को सरकार से एमएस अधिनियम में संशोधन कराया जिसके परिणामस्वरुप धारा 80 को हटा दिया गया । संशोधन करते समय ये स्पष्ट कर दिया गया था कि ये संशोधन इस तिथि से पहले मूल अधिनियम के अंतर्गत प्रदान या मान्य किसी सीओएस पर लागू नहीं होगा । इसलिए, इस तिथि से पूर्व जारी सीओएस वैध बने रहे । आज तक अनेक योग्य पूर्व-नौसेना अधिकारी सीओएस के आधार पर विभिन्न क्षमताओं में मर्चेंट जहाज़ों पर सफलतापूर्वक नौकायन कर रहे हैं ।

नेवी लिमिटेड परीक्षा (एनएलई)

वे सीओएस धारक जो मास्टर (एफजी) के रूप में सीओसी प्राप्त करने की इच्छा रखते थे, उनके लिए नेवी लिमिटेड परीक्षा (एनएलई) में उत्तीर्ण होना आवश्यक था, जिसमें चार प्रश्नपत्र और एक मौखिक परीक्षा शामिल होती थी । तीन प्रश्न पत्रों में भारतीय नौसेना के अधिकारियों को मर्चेंट नेवी के अधिकारियों के साथ-साथ परीक्षा में उपस्थित होना होता था । हमारे अधिकारी कार्गो वर्क और जहाज़ प्रबंधन के ऊपर केवल एक प्रश्न पत्र में अलग से उपस्थित होते थे क्योंकि इस विषय को मर्चेंट मरीन अधिकारियों की पहली मेट परीक्षा में शामिल किया जाता था । नए एसटीसीडब्लू नियमों के कारण वर्ष 98 के अंत से प्रभावी होते हुए एनएलई को बंद कर दिया गया था ।

एसटीसीडब्लू-95 योग्यता प्रमाणपत्र के लिए एमएस नोटिस

एसटीसीडब्लू पर वर्ष 1995 में आईएमओ के एक अन्य सम्मलेन का आयोजन किया गया था । उस सम्मलेन की अनुशंसाओं के आधार पर, सरकार द्वारा 01 अगस्त 98 से मर्चेंट शिपिंग (एसटीसीडब्लू) 98 नियम लागू किए गए । इन नियमों ने 01 फरवरी 2002 से सेवा प्रमाणपत्र को अमान्य कर दिया है जिसके कारण अधिकतर पूर्व-नौसेना अधिकारी मर्चेंट जहाज़ों पर सेवा करने के अयोग्य हो गए हैं । इन नियमों द्वारा सीओएस का सीओसी में रूपांतरण अनिवार्य हो गया है ताकि नौसेना अधिकारी जहाज़ पर 01 फरवरी 2002 के बाद अपना रोज़गार जारी रख सकें ।

डीजी शिपिंग द्वारा इन विनियमों का प्रयोग कर बदलाव लाया गया जिनका लक्ष्य विशेष रूप से नौसेना अधिकारी थे' । उन्होंने एमएस नोटिस 2/2000 को लागू किया जिसे बाद में कार्यकारी शाखा के अधिकारियों के लिए एमएस नोटिस संख्या 04/2001 और इंजीनियरिंग शाखा के अधिकारियों के लिए संख्या 06/2001 द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया गया था । ये एमएस नोटिस एसटीसीडब्लू-95 अनुवर्ती सीओसी प्राप्त करने वास्ते सीओएस धारकों के लिए 2-24 सप्ताह चलने वाले प्रशिक्षक पाठ्यक्रमों और उसके बाद लिखित व मौखिक परीक्षाओं का निर्धारण करते हैं । दूसरी ओर सीओसी धारक बिना कोई परीक्षा दिए केवल 2 सप्ताह वाले मॉड्यूलर पाठ्यक्रम को पूरा कर अपने प्रमाणपत्र एसटीसीडब्लू-95 अनुवर्ती बना सकते हैं ।

एनएचक्यू ने सरकार में सभी स्टारों पर विभिन्न बैठकों में इस भेदभाव के खिलाफ विरोध किया है । एनएचक्यू द्वारा मई 99 से ही डीजी शिपिंग का ध्यान इस मामले की ओर दिलाया जा रहा है । इसके बाद कैबिनेट सचिव व रक्षा सचिव द्वारा अलग से बैठकें आयोजित की गई हैं । यहाँ तक कि नौसेना अधिकारियों के लिए एक निष्पक्ष समझौते की मांग करने के लिए जहाजरानी मंत्री से व्यक्तिगत रूप से संपर्क किया गया है ।

इस बीच वर्ष 2000 के अंत में, सीओएस धारक कुछ पूर्व-नौसेना अधिकारियों ने डीजी शिपिंग के भेदभावपूर्ण वाले आदेशों के खिलाफ मुंबई उच्च न्यायलय में एक याचिका दायर की थी । उच्च न्यायलय से प्रतिकूल निर्णय पाने पर, अधिकारियों ने हाल ही में उच्चतम न्यायलय में याचिका दायर की है । अगली सुनवाई नवंबर 2002 के अंत में निर्धारित की गई है ।

मई 2002 के अंत की स्थिति

डीजी शिपिंग ने, एमएस नोटिस संख्या 02/2002 देखें, एसटीसीडब्लू-95 की क्रियान्वयन तिथि में छह माह का विस्तार किया है, यानी 31 जुलाई 2002 तक । सभी सीओएस इस तिथि तक विदेश जाने वाले जहाज़ों के ऊपर भी मान्य रहेंगे ।

सीओएस धारकों को एमएस नोटिस संख्या 05/2001 के अनुरूप 31 जुलाई 2002 से परे ओएसवी, एमएसवी आदि सहित भारतीय जल के भीतर आवागमन करने वाले जहाज़ों पर रोज़गार मिलना जारी रहेगा ।

सीओएस की स्थिति से जुड़े मामले पर उच्चतम न्यायलय में अगली सुनवाई 26 नवंबर 2002 को तय की गई है । आशा है ये सुनवाई अंतिम होगी और इसे स्थगित नहीं किया जाएगा ।

सीओएस धारक एलबीएस सीएएनसीएआर, मुंबई में प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों को पूरा कर और एमएस नोटिस संख्या 04/2001 और 06/2001 के साथ अनुरूपता में, जहाँ लागू हो, प्रासंगिक विषयों में एमएमडी परीक्षा उत्तीर्ण कर सीओसी को प्राप्त कर सकते हैं । हालाँकि, उच्चतम न्यायलय के निर्णय की प्रतीक्षा करना उचित है ।

सीओसी को प्राप्त करने के लिए, मर्चेंट जहाज़ों पर 6 माह से कम के अनुभव वाले कार्यकारी शाखा अधिकारियों के लिए एलबीएस सीएएमसीएआर, मुंबई में मास्टर के दोनों फेज़ - 1 और फेज़ - 2 और फर्स्ट मेट प्रशिक्षण में उपस्थित रहना आवश्यक है । इसकी कुल अवधि 4 माह है । अधिकारी फेज़ - 1 में शामिल होते हैं और उन्हें एक माह के बाद फेज़ - 2 में स्थानांतरित कर दिया जाता है । फेज़ - 1 प्रशिक्षण 15 मार्च, 15 जून, 15 सितम्बर और 15 दिसंबर से आरंभ होता है और फेज़ - 2 15 अप्रैल, 15 जुलाई, 15 सितम्बर और 15 जनवरी से आरंभ होता है ।

प्रशिक्षण के प्रत्येक चरण की कुल फीस मैरीटाइम एजुकेशन ट्रस्ट (एमएमईआरटी) के लिए 7250/- रूपए और एलबीएस, मुंबई के लिए 5550/- रूपए है । क्योंकि नौसेना अधिकारी फेज़ - 1 में केवल एक माह का प्रशिक्षण लेते हैं, इसलिए एलबीएस द्वारा थोड़ी छूट दी जा सकती है ।

एडवांस शिपबोर्ड मैनेजमेंट पाठ्यक्रम 15 मई, 15 जुलाई, 15 सितम्बर और 15 नवंबर से आरंभ होता है । इस पाठ्यक्रम की फीस ट्रस्ट के लिए 1850/- रूपए और एलबीएस के लिए 3750/- रूपए है ।

अधिकारियों द्वारा पूरा किए जाने वाले मॉड्यूलर पाठ्यक्रम

वे अधिकारी जिनके पास सीओएस है और जो ओएसवी या अन्य तटीय जहाज़ में शामिल होना चाहते हों, उनके लिए निम्नलिखित मॉड्यूलर पाठ्यक्रम पूरा करना आवश्यक होता है

Modular Courses
क्रम संख्या पाठ्यक्रम अवधि सप्ताह में
1 रडार ऑब्जर्वर सिम्युलेटर कोर्स (आरओसी) 2
2 ऑटोमेटिक रडार प्लॉटिंग ऐड (एआरपीए) 1
3 मेडिकल केयर (मेडिकेयर) * 2
4 पर्सनल सेफ्टी एंड सोशल रेस्पोंसिबिलिटी (पीएसएसआर) * 3 दिन
5 प्रोफिशियेंसी इन सर्वाइवल क्राफ्ट एंड रेस्क्यू बोट (पीएससीआरबी) * 1
6 मास्टर्स रीवेलिडेशन एंड अपग्रेडेशन ट्रेनिंग कोर्स (आरयूटीसी) 2
7 जीएमडीएसएस ऑपरेटर्स कोर्स (जीओसी) 2
8 एडवांस फायर फाइटिंग (एएफएफ) * 1
9 रडार, एआरपीए और नेविगेशन सिम्युलेटर कोर्स 1
10 सीओएस धारकों के लिए रिफ्रेशर कोर्स 1

नोट: तकनीकी अधिकारियों के लिए केवल चिह्नित (*) पाठ्यक्रमों को पूरा करने की आवश्यकता है

पुनर्संस्थापन महानिदेशक (डीजीआर) ने मई 2002 से अधिकारियों के लिए प्री-रिलीज़ प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के रूप में पैकेज पाठ्यक्रम का आयोजन आरंभ किया है जिसमें मॉड्यूलर पाठ्यक्रम 1 से 8 शामिल हैं । इस पाठ्यक्रम का नाम सीफेरर्स प्रशिक्षण पाठ्यक्रम है और इसकी अवधि 81 दिन है ।इस पाठ्यक्रम का आयोजन नेवल मैरीटाइम अकादमी, मुंबई में किया जा रहा है । पैकेज का आयोजन बहुत ही रियायती दर पर किया जा रहा है और आठ मॉड्यूलर पाठ्यक्रमों का कुल शुल्क 31,450/- रूपए है । अधिकारियों के लिए आवेदन के साथ-साथ डीएसएलओ ट्रेनिंग फंड, नई दिल्ली के पक्ष में आहरित डीडी द्वारा कुल फीस का केवल 40% भुगतान करने की आवश्यकता है, यानी 12,600/- रूपए । तकनीकी शाखाओं के अधिकारियों के लिए फीस के रूप में मात्र 3560/- रूपए देने की आवश्यकता है ।

01 जुलाई 03 तक एसटीसीडब्लू पाठ्यक्रम संबंधित नीति के लिए यहाँ क्लिक करें

सीफेरर्स प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के लिए सभी आवेदनों को डीईएसए/एनएचक्यू के पास भेजा जाना है । अगले पाठ्यक्रम की अनुसूची के लिए डीएनटी/डीईएसए/डीओपी के संपर्क में रहें ।

डीजी शिपिंग द्वारा निरंतर निर्वहन प्रमाणपत्र के साथ नाविक पहचान दस्तावेज़ (सीडीसी) के मामले पर अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें

नौसेना अधिकारियों द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त करने के ऊपर एसटीसीडब्लू पाठ्यक्रम नीति

भारतीय नौसेना अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन द्वारा निर्धारित विनियमों के साथ अनुरूपता में आरंभ से सभी प्रासंगिक प्रशिक्षण एसटीसीडब्लू-95 अनुवर्ती बनाने की प्रक्रिया में है ।

एसटीसीडब्लू-95 मानदंडों का पालन करने वास्ते सेवारत नौसेना अधिकारियों के लिए अतिरिक्त प्रशिक्षण के मामले की जांच द्वारा की जा रही है । निर्णय लिया गया है कि प्रति वर्ष सीमित संख्या में योग्य अधिकारियों के लिए माइनर हेड 800(f)(i) के अंतर्गत अनौपचारिक पाठ्यक्रमों के रूप में, अधिकृत समुद्री संस्थानों द्वारा प्रस्तुत मौजूदा एसटीसीडब्लू-95 प्रशिक्षण सुविधाएं प्राप्त की जाएं । अधिकारियों द्वारा इन पाठ्यक्रमों को पूरा करने वास्ते नियम व शर्तों को शासित करने वाले नीतिगत दिशानिर्देश इस प्रकार से हैं

  • पाठ्यक्रम । अधिकारी निम्नलिखित एसटीसीडब्लू पाठ्यक्रमों का चयन कर सकते हैं
    • समुद्र-पूर्व व मॉड्यूलर पाठ्यक्रम ।
    • कम्पिटेंसी II/I मेट (फेज़ I और फेज़ II)/समकक्ष एमईओ पाठ्यक्रम ।
    • एडवांस शिपबोर्ड मैनेजमेंट पाठ्यक्रम ।
  • योग्यता
    • न्यूनतम 15 वर्ष की सेवा के साथ (एक्स) और (ई) शाखाओं के स्थायी कमीशन अधिकारी ।
    • न्यूनतम आठ वर्ष की सेवा के साथ एसएससी लेफ्टिनेंट/लेफ्टिनेंट कमांडर (एक्स) और (ई) ।
    • एनओ (स्टार) 9/94 के साथ अनुरूपता में पाठ्यक्रमों के समापन पर तीन वर्षीय अवशिष्ट सेवा ।
    • चिकित्सा श्रेणी: S2A2 के नीचे नहीं ।
  • आवेदन व चयन । पाठ्क्रमों को पूरा करने के लिए योग्य अधिकारियों से आवेदन प्रशिक्षण लागत का निर्धारण करने के बाद एनओ (स्टार) के साथ अनुरूपता में चयन के लिए एए के माध्यम से एनएचक्यू/डीओपी को जमा किए जाने हैं । सेवा की अनिवार्यताओं के ऊपर निर्भर करते हुए चयनित मामलों को आगे कार्यवाही के लिए डीएनटी के पास भेजा जाएगा । अधिकारियों के लिए पाठ्यक्रम के समापन पर कम से कम तीन वर्ष तक सेवा करने का वचन देने की आवश्यकता होगी ।
  • प्रशिक्षण शुल्कों की धन वापसी । यदि अधिकारी तीन वर्ष की अवधि की समाप्ति से पहले या पाठ्यक्रम में असफल होने पर समय से पहले सेवानिवृत्ति की मांग करता है, तो प्रशिक्षण की पूर्ण लागत को वसूला जाएगा ।
  • प्रशिक्षण संस्थान । जहाँ तक संभव हो सके इन पाठ्यक्रमों को भारत सरकार / शिपिंग महानिदेशक द्वारा विधिवत अनुमोदित निकटतम समुद्री संस्थानों में पूरा किया जाना चाहिए, जहाँ बेसिक और स्पेशलिस्ट पाठ्यक्रमों का आयोजन नियमित रूप से किया जाता हो ।
  • नियोजनीयता । एसटीसीडब्लू पाठ्यक्रमों को पूरा करने वाले अधिकारी को सीओएफवाई, एनसीएसओ, कार्य-दलों, प्रशिक्षण स्कूलों/प्रतिष्ठानों अदि जैसे उपयुक्त बिलेट्स में रोज़गार दिया जा सकता है ।
  • प्रशिक्षण की लागत । प्रशिक्षण की लागत (पाठ्यक्रम की फीस) का भुगतान प्रासंगिक वित्तीय विनियमों के अंतर्गत सीडीए (नौसेना) द्वारा सीधे संबंधित प्रशिक्षण संसथान को किया जाएगा । आवश्यक आकस्मिक बिल उत्पन्न करने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी की होगी । पाठ्यक्रमों की लागत का भुगतान माइनर हेड 800(f)(i) के अंतर्गत 'लघु/अनौपचारिक पाठ्यक्रम' के प्रति एनएचक्यू/डीएनटी को आवंटित धन में से किया जाएगा । अनुलग्नक में आकस्मिक बिल के नमूने की एक कॉपी शामिल है ।

यह नीति 01 जुलाई 03 से प्रभाव में आएगी ।

आपसे अनुरोध है कि इस पत्र की सामग्री का व्यापक प्रचार किया जाए ।

प्राधिकरण: रक्षा मंत्रालय के एकीकृत मुख्यालय (नौसेना)/डीएनटी पत्र टीआर/0886/एसटीसीडब्लू/पी दिनांक 22 मई 03 ।

सेवारत अधिकारीयों को सीडीसी जारी करना

सेवारत नौसेना अधिकारियों को सीडीसी प्रदान करने के मामले पर एक लंबे समय से डीजी शिपिंग के साथ चर्चा चल रही है । अनुमान लगाया जाता है कि डीजी शिपिंग ने, एमनोटिस 5/2004 और डीजीएस आदेश 1/2004 देखें, निम्न के अंतर्गत सेवारत अधिकारीयों को सीडीसी जारी करने की अनुमति दे दी है

  • अधिकारी संबंधित कमान मुख्यालय द्वारा अनुप्रमाणित अपने सेवानिवृत्ति आदेश को प्रस्तुत कर सीडीसी पाने के हकदार होंगे ।
  • समुद्र के अनुभव के लिए मर्चेंट नेवी जहाज़ों में अस्थायी रूप से कार्यरत अधिकारी कार्य अवधि के लिए सीडीसी पाने के पात्र होंगे ।

प्राधिकरण: रक्षा मंत्रालय का एकीकृत मुख्यालय (नौसेना) पत्र संख्या एनए/1387/डीजी शिपिंग 02 जून 04 ।

एम.एस. नोटिस संख्या 2004 में से 5

  • यह कि भारतीय नौसेना के अधिकारियों ने सेवा के दौरान निरंतर निर्वहन प्रमाणपत्र के साथ नाविक पहचान दस्तावेज़ (सीडीसी) जारी करने के लिए इस निदेशालय से संपर्क किया है ।
  • यह कि इस मामले के ऊपर पूर्ण रूप से विचार किया गया है और, तदनुसार, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति पत्र की एक प्रति नौसेना मुख्यालय में जमा कर और सीडीसी के लिए निर्धारित आवेदन के साथ-साथ संबंधित नौसेना कमान मुख्यालय द्वारा अनुप्रमाणित किए जाने पर सेवारत नौसेना अधिकारियों को सीडीसी जारी की जाएगी ।
  • यह कि जारी की गई सीडीसी नौसेना अधिकारी को नौसेना से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के बाद मर्चेंट नेवी में शामिल होने में सक्षम करेगी ।
  • यह कि ऐसे नौसेना अधिकारी जो पहले से ही सेवानिवृत्त हो चुके हों उन्हें भी सीडीसी जारी किया जाएगा ।
  • यह कि शिपिंग मास्टर द्वारा उस नौसेना अधिकारी को अधिकारी वर्ग में सीडीसी जारी किया जाएगा । ये नोटिस तात्कालिक प्रभाव से लागू होता है ।

प्राधिकरण: डीजी शिपिंग पत्र संख्या 13(1)सीआर/2003 दिनांक 28 अप्रैल 2004 ।

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