पनडुब्बी शक्ति का वर्ष - 2017

पनडुब्बी शक्ति का वर्ष - 2017

भारतीय नौसेना ने 2017 में अपनी पनडुब्बी शक्ति की शुरूआत की स्वर्ण जयंती मनायी। राष्ट्र के लिए गौरवशाली सेवा के 50 वर्षों का स्मरणोत्सव मनाने के लिए, 2017 को ‘पनडुब्बी शक्ति के वर्ष’ के रूप में घोषित किया गया। स्वर्ण जयंती को हमारी नौसेना शक्ति को प्रवर्तकों को याद करने तथा नौसेना के पनडुब्बी स्टाफ के अतीत के 50 वर्षों को सम्मानित करने के एक अवसर के रूप में संकल्पना की गयी थी। समारोह की प्रमुख विशिष्टताओं में से एक भारत के माननीय राष्ट्रपति द्वारा 08 दिसंबर 2017 को भारतीय नौसेना की पनडुब्बी शक्ति को प्रतिष्ठित ‘प्रेसीडेंट कलर’ अवार्ड प्रदान करना था।

भारतीय नौसेना की समुद्र के नीचे युद्ध की वीरगाथा 8 दिसम्बर 1967 को रीगा –पूर्व में सोवियत नौसेना का बेस वर्तमान में- लाटविया में अत्याधुनिक प्रकार के 641 ‘फॉक्सट्रोट’ श्रेणी की पनडुब्बी ‘कल्वारी’ पर तिरंगे को गर्व से फहराया गया था। पनडुब्बी बल ने अपने गठन के कुछ वर्षों के अंदर एक सक्रिय युद्ध देखा। वे भारतीय उप महाद्वीप में उपद्रवी समय में थे। 1971 में पाकिस्तान द्वारा भारत पर युद्ध के लिए जोर दिया गया तथा नए शामिल किए गए ‘स्टील के शार्क’ ने युद्ध के दौरान पहला अनुभव किया क्योंकि दुश्मन की समुद्री सम्पत्तियों को प्रभावी रूप से अपमानजनक स्थिति में लाने के लिए हमारी पनडुब्बियों को अन्य अग्रपंक्ति की नौसेना की इकाइयों के साथ तैनात किया गया था।

1970 और 80 के दशक के दौरान, पनडुब्बी शक्ति की क्षमता और सक्षमता में बहुत विस्तार हुआ। समकालीन परम्परागत पनडुब्बियों को दो स्वतंत्र स्रोतों से प्राप्त किया गया था तथा चार्ली वर्ग की परमाणुचालित पनडुब्बी को पट्टे पर लेने के साथ परमाणुचालित पनडुब्बी से भी हमारा पहला वास्ता था। 1999 में ऑपरेशन विजय तथा 2002 में ऑपरेशन पराक्रम के दौरान ‘पहले तैनाती, आखिर में वापसी’ – के मसले को ध्यान में रखते हुए, हमारी पनडुब्बियों को अन्य नौसेना के बलों के साथ अभियान के लिए इकट्ठा किया।

नौसेना की पनडुब्बी शक्ति का एक विचित्र इतिहास रहा है और इस प्रकार पिछले 50 वर्षों में, रूस, पश्चिमी देशों तथा स्वदेशी मूल की परंपरागत और परमाणुचालित छह अलग-अलग वर्गों की 25 पनडुब्बियों से नौसेना का ध्वज गर्व से शोभायमान है। कर्मीदलों ने इन नौकाओं को असाधारण व्यावसायिकता एवं प्रतिबद्धता के साथ समीप और दूर जल में संचालित किया है, तथा उल्लेखनीय रूप से भारत के समुद्री हित की सुरक्षा के नौसेना के जनादेश के लिए योगदान किया है।

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